मन की शक्ति
मन की शक्ति
मन यदि शक्तिशाली है और अपनी शक्ति का उपयोग करने के लिए सजग है , तो वह इंद्रियों को आदेश देकर एक ही लक्ष्य पर केंद्रित कर सकता है । ऐसी अवस्था में सभी इंद्रियां अपनी पूरी क्षमताओं का उपयोग करके बड़े - से - बड़े कार्य को भी आसानी से पूरा कर सकती हैं । मन यदि अपने कर्तव्य के प्रति सजग नहीं है , तो इंद्रियां भी अनुशासनहीनता करने लगती हैं । ऐसी स्थिति में उनकी शक्ति विभाजित हो सकती है । शक्ति के विभाजित हो जाने के कारण कोई भी कार्य भली प्रकार नहीं किया जा सकता । मन को शक्तिशाली बनाने के लिए उसे कार्य की उथल - पुथल और चिंता से बचाना चाहिए तथा उसको पूरी तरह से शांत रखना चाहिए , जिससे वह अपनी शक्तियों का भली प्रकार उपयोग कर सके ।
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