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विचारों का शरीर पर प्रभाव

विचारों का शरीर पर प्रभाव 

जब व्यक्ति निराश एवं उदास रहता है , तो इसका प्रभाव उसके पाचन तंत्र पर पड़ने लगता है । पाचन तंत्र बिगड़ जाता है , जिसका प्रभाव यह होता है कि उस व्यक्ति की भूख कम हो जाती है , रक्त संचार में गड़बड़ आ जाती है , मांस - पेशियों की सक्रियता पर भी इसका प्रभाव पड़ता है । व्यक्ति का भार भी कम होने लगता है । जब कोई व्यक्ति मानसिक तनाव में रहता है , तो उसके प्रभाव से उसे पेट का अलसर , रक्तचाप , चर्म रोग और गठिया आदि रोग लग जाने की संभावना बनी रहती है । एलर्जी एवं माइग्रेन ( सिर दर्द ) भी मानसिक तनाव से ही पैदा होते हैं । जो व्यक्ति सदा भयभीत रहता है , उसके शरीर की शक्ति क्षीण होती जाती है । जो व्यक्ति बहुत लोभी होता है , उसे रक्तहीनता की बीमारी होने की संभावना बनी रहती है । जो व्यक्ति अहंकारी होता है , उसके मन में कभी भी चैन नहीं पैदा हो पाता है । वह सदा स्वयं को ही सही सिद्ध करने के प्रयास में लगा रहता है । जो व्यक्ति नकारात्मक विचार रखता है , उसके रक्त में विषैले तत्व बढ़ते जाते हैं , जो कई प्रकार के रोग पैदा करते हैं ।

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को एक नियमित कार्यक्रम के अनुसार जीवन जीना चाहिए । जीवन में पूर्णता एवं संतुष्टि की भावना एक टॉनिक का कार्य करती है । शारीरिक रोगों की जड़ मन के अंदर ही स्थित होती है । मन संबंधी रोगों को ' आधि ' कहा जाता है और शारीरिक रोगों को ‘ व्याधि ’ कहा जाता है । काम क्रोध , लोभ , द्वेष और अहंकार आदि को मन के नकारात्मक विचार माना जाता है । इनका प्रभाव टी.वी. कैंसर आदि से भी अधिक संक्रामक होता है । इसीलिए कहा जाता है कि जैसा सोचोगे , वैसा ही बन जाओगे । अच्छे विचारों का शरीर पर अच्छा प्रभाव पड़ता है और नकारात्मक विचारों का शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है ।

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