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मस्तिष्क तरंगों का योगदान

मस्तिष्क तरंगों का योगदान

 शरीर पर विचारों का प्रभाव किस प्रकार और क्यों पड़ता है , यह स्पष्ट करने के लिए वैज्ञानिकों ने चार प्रकार की मस्तिष्क तरंगों का पता लगाया है । वे हैं - अलफा , बीटा , थीटा और डेल्टा ।

 अलफा तरंग -यह तरंग उस समय पैदा होती है , जब मस्तिष्क शांत , निष्क्रिय , तटस्य और तनावरहित अवस्था में होता है । यह तरंग प्रति सेकंड 8 से 13 चक्कर लगाती है । जब भी कोई योगी ध्यान अवस्था में होता है , तो उसके मस्तिष्क में यही अलफा तरंगों वाली स्थिति पैदा हो जाती है । साधारण व्यक्ति भी जब कभी इस अवस्था में आ जाता है , तो वह एक विशेष आनंद का अनुभव करने लगता है । मानव जीवन में यह एक परमानंद की अवस्था है । लोभी , क्रोधी एवं ईर्ष्या - द्वेष से युक्त व्यक्ति इस अवस्था में पहुंच नहीं पाते हैं ।

 बीटा तरंग : बीटा तरंग उस समय पैदा होती है , जब व्यक्ति दत्त चित्त होकर किसी कार्य में लगा होता है । यह तरंग एक सेकंड में 14 या इससे अधिक चक्कर लगाती है यह दिमाग के सक्रिय होने की स्थिति है । जैसे जोड़ना , हिसाब लगाना या किसी समस्या का हल सोचना आदि के समय की अवस्था है ।

थीटा तरंग -यह नींद से पूर्व या अर्द्धनिद्रित अवस्था में उठती है । यह एक सेकंड में 4 से 6 चक्कर लगाती है । 

डेल्टा तरंग - यह नींद की अवस्था में उठती है और एक सेकंड में से 6 चक्कर लगाती है ।

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